US-ईरान वार्ता इस्लामाबाद में, ट्रंप का ‘नया डील’ प्लान

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दैनिक बुलन्द मंज़िल

इस्लामाबाद (पाकिस्तान) बना ‘शांति का केंद्र’पाकिस्तान की भूमिका: तुर्की या ओमान के बजाय इस बार पाकिस्तान ने मध्यस्थ (Mediator) की भूमिका निभाई है। इस्लामाबाद में दोनों देशों के उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडलों के बीच यह बातचीत चल रही है।डोनाल्ड ट्रंप का बयान: राष्ट्रपति ट्रंप ने पुष्टि की है कि उनका प्रशासन ईरान के साथ एक “नया और बेहतर समझौता” (New Deal) चाहता है जो न केवल परमाणु कार्यक्रम बल्कि मिसाइल परीक्षणों पर भी अंकुश लगाए। 2. बातचीत के मुख्य बिंदु (Agenda)परमाणु कार्यक्रम: अमेरिका चाहता है कि ईरान अपने यूरेनियम संवर्धन (Enrichment) को पूरी तरह रोक दे।क्षेत्रीय तनाव: लाल सागर (Red Sea) और हॉरमुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में जहाजों पर होने वाले हमलों को रोकने पर चर्चा हो रही है।कैदियों की अदला-बदली: खबर है कि दोनों देश एक-दूसरे की हिरासत में मौजूद नागरिकों को छोड़ने पर भी सहमत हो सकते हैं। 3. ट्रंप की ‘सख्त और नरम’ नीतिएक तरफ ट्रंप प्रशासन ने उन देशों पर 50% टैरिफ लगाने की धमकी दी है जो ईरान को हथियार दे रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ वे सीधे संवाद कर रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यह ट्रंप की “Art of the Deal” रणनीति का हिस्सा है—अधिकतम दबाव बनाकर बातचीत की मेज पर लाना। 4. इज़राइल और खाड़ी देशों की प्रतिक्रियाइज़राइल: बेंजामिन नेतन्याहू की सरकार इस सीधी बातचीत को लेकर थोड़ा असहज है। इज़राइल का मानना है कि ईरान पर भरोसा नहीं किया जा सकता और केवल कड़े प्रतिबंध ही समाधान हैं।खाड़ी देश (Saudi & UAE): सऊदी अरब और यूएई इस कदम का सावधानी से स्वागत कर रहे हैं, क्योंकि वे क्षेत्र में स्थिरता चाहते हैं ताकि उनका व्यापार प्रभावित न हो। 5. भारत पर इसका क्या असर होगा?कच्चा तेल: अगर यह बातचीत सफल होती है और ईरान पर से प्रतिबंध हटते हैं, तो तेल की कीमतें वैश्विक बाज़ार में तेज़ी से गिरेंगी, जिससे भारत को बड़ी राहत मिलेगी।चाबहार पोर्ट: भारत के लिए चाबहार बंदरगाह परियोजना में निवेश करना और उसे पूरी तरह चालू करना आसान हो जाएगा।

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