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दुनिया अब एक नए तरह के डिजिटल खतरे का सामना कर रही है, जहां हैकर्स इंसानों की जगह अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI का इस्तेमाल कर रहे हैं। हाल ही में सामने आई एक रिपोर्ट के मुताबिक साइबर अपराधियों ने AI की मदद से एक बड़े ओपन-सोर्स सिस्टम में ऐसी खामी खोज निकाली थी, जो टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन (2FA) जैसी मजबूत सुरक्षा को भी तोड़ सकती थी।

2FA वही सुरक्षा है जिसका इस्तेमाल बैंक अकाउंट, सोशल मीडिया और ईमेल जैसी सेवाओं में किया जाता है। अगर यह हमला सफल हो जाता, तो लाखों अकाउंट बिना पासवर्ड के हैक हो सकते थे। हालांकि समय रहते इस कमजोरी को ठीक कर लिया गया और बड़ा साइबर हमला टल गया।

कैसे पता चला कि कोड AI ने लिखा था?

विशेषज्ञों को जांच के दौरान कई ऐसे संकेत मिले, जिनसे साफ हो गया कि हमला करने वाला कोड इंसान ने नहीं बल्कि AI ने तैयार किया था। कोड की भाषा बेहद औपचारिक और मशीन जैसी थी। इतना ही नहीं, उसमें एक नकली “CVSS स्कोर” भी मिला, जो असल में मौजूद ही नहीं था। AI की इसी गलती को “Hallucination” कहा जाता है।

क्या होता है ‘Zero-Day Exploit’?

इसे ऐसे समझिए जैसे घर के ताले में कोई ऐसी कमी हो, जिसके बारे में मालिक को पता ही न हो लेकिन चोर को उसकी जानकारी मिल जाए। साइबर दुनिया में ऐसी छिपी कमजोरियों को “Zero-Day Vulnerability” कहा जाता है। पहले इन्हें खोजने के लिए बड़े एक्सपर्ट हैकर्स चाहिए होते थे, लेकिन अब AI की मदद से सामान्य हैकर्स भी यह काम तेजी से कर पा रहे हैं।

क्यों बढ़ गया खतरा?

रिपोर्ट के अनुसार चीन और उत्तर कोरिया से जुड़े कई हैकिंग ग्रुप AI का इस्तेमाल कर:

  • नए मालवेयर बना रहे हैं
  • एंटीवायरस से बचने के तरीके खोज रहे हैं
  • पासवर्ड चोरी और डिजिटल जासूसी कर रहे हैं

यही वजह है कि विशेषज्ञ अब इसे “AI Cyber War” की शुरुआत मान रहे हैं।

अब आगे क्या?

साइबर सुरक्षा एजेंसियां भी अब AI की मदद से बचाव कर रही हैं, लेकिन चिंता की बात यह है कि अपराधी अक्सर नई तकनीक को पहले अपना लेते हैं। इसलिए आने वाले समय में डिजिटल सुरक्षा दुनिया की सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक बन सकती है।

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