यह समझौता भारत के भविष्य की तकनीक और स्वच्छ ऊर्जा (Clean Energy) के लिए गेम-चेंजर माना जा रहा है।

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दैनिक बुलन्द मंजिल समाचार

14 मार्च 2026 की ताजा अपडेट के अनुसार, इस डील की मुख्य बातें यहाँ दी गई हैं:

1. समझौते का मुख्य उद्देश्य
भारत और अमेरिका Critical Minerals (महत्वपूर्ण खनिज) जैसे कि लिथियम, कोबाल्ट, निकेल और ग्रेफाइट की सप्लाई चेन को मजबूत करने के लिए हाथ मिला रहे हैं। इसका लक्ष्य इन खनिजों के लिए चीन पर निर्भरता को कम करना है।

  1. भारत को क्या फायदा होगा?
    इलेक्ट्रिक वाहन (EV): लिथियम और कोबाल्ट के बिना EV बैटरी बनाना असंभव है। इस डील से भारत में सस्ती बैटरियों का उत्पादन आसान होगा।
    हाई-टेक इंडस्ट्री: स्मार्टफोन, लैपटॉप, डिफेंस इक्विपमेंट और सोलर पैनल बनाने के लिए आवश्यक कच्चे माल की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित होगी।
    निवेश: अमेरिकी कंपनियां भारत में इन खनिजों की प्रोसेसिंग और रिफाइनिंग यूनिट्स लगाने के लिए भारी निवेश करेंगी।
  2. ‘मिनरल सिक्योरिटी पार्टनरशिप’ (MSP)
    भारत अब अमेरिका के नेतृत्व वाले MSP का सक्रिय हिस्सा है। इस समझौते के तहत:
    दोनों देश गहरे समुद्र और अन्य देशों (जैसे अफ्रीका और दक्षिण अमेरिका) में मिलकर खनिजों की खोज (Exploration) करेंगे।
    अमेरिका भारत को इन खनिजों को रिफाइन करने की आधुनिक तकनीक (Technology Transfer) प्रदान करेगा।
  3. चीन को चुनौती
    वर्तमान में दुनिया के 70% से अधिक महत्वपूर्ण खनिजों की प्रोसेसिंग चीन करता है। भारत-अमेरिका का यह तालमेल एक ‘अल्टरनेटिव सप्लाई चेन’ खड़ी करने की कोशिश है, ताकि भविष्य में युद्ध या तनाव की स्थिति में सप्लाई न रुके।
    महत्वपूर्ण खनिज मुख्य उपयोग
    लिथियम (Lithium) EV बैटरी, मोबाइल फोन
    कोबाल्ट (Cobalt) एयरोस्पेस, सुपर-अलॉय
    ग्रेफाइट (Graphite) सोलर सेल, परमाणु रिएक्टर
    रेयर अर्थ एलिमेंट्स डिफेंस सिस्टम, सेमीकंडक्टर्स

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